| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » दोहा 118 |
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| | | | काण्ड 1 - दोहा 118  | जेहि इमि गावहिं बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।
सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान॥118॥ | | | | अनुवाद | | | | जिनका वेद और पंडित इस प्रकार वर्णन करते हैं और जिनका ऋषिगण ध्यान करते हैं, वे ही दशरथनन्दन, भक्तों के हितकारी, अयोध्या के स्वामी भगवान श्री रामचन्द्रजी हैं। | | | | The one whom the Vedas and the Pandits describe in this manner and whom the sages meditate upon, is the same Dasharathanandan, benefactor of the devotees, Lord Shri Ramchandraji, the Lord of Ayodhya. | |
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