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काण्ड 1 - चौपाई 71.4  |
अस कहि परी चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा॥
बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं॥4॥ |
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| अनुवाद |
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| यह कहकर मैना अपने पति के चरणों पर सिर रखकर गिर पड़ीं। तब हिमवान ने प्रेमपूर्वक कहा- चन्द्रमा में अग्नि प्रकट हो तो भी नारदजी का वचन झूठा नहीं हो सकता। |
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| Saying this Maina fell down with her head on her husband's feet. Then Himavan said lovingly- Even if fire appears in the moon, Naradji's words cannot be false. |
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