श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 51.4
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 51.4 
जासु कथा कुंभज रिषि गाई। भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई॥
सोइ मम इष्टदेव रघुबीरा। सेवत जाहि सदा मुनि धीरा॥4॥
 
अनुवाद
 
 जिनकी कथा अगस्त्य मुनि ने गाई थी और जिनकी भक्ति मैंने मुनि को सुनाई थी, वे मेरे प्रिय देवता श्री रघुवीरजी हैं, जिनकी बुद्धिमान मुनिगण सदैव सेवा करते हैं।
 
Whose story was sung by Sage Agastya and whose devotion I narrated to the sage, he is my favorite deity Shri Raghuveerji, whom wise sages always serve.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas