श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 51.3
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 51.3 
जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी॥
सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ॥3॥
 
अनुवाद
 
 यद्यपि भवानी ने खुलकर कुछ नहीं कहा, किन्तु सर्वज्ञ शिव सब कुछ जानते थे। उन्होंने कहा- हे सती! सुनो, तुम्हारा स्वभाव स्त्रैण है। ऐसा संदेह कभी मन में नहीं लाना चाहिए।
 
Although Bhavani did not say anything openly, but the omniscient Shiva knew everything. He said- O Sati! Listen, you have a womanly nature. Such doubts should never be kept in mind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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