| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 333.3 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 333.3  | भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठईं जनक अनेक सुसारा॥
तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा॥3॥ | | | | अनुवाद | | | | अनगिनत बैलों और पालकियों पर लादकर उसे प्रचुर मात्रा में भेजा गया। जनकजी ने अनेक सुंदर शय्याएँ भी भेजीं। एक लाख घोड़े और पच्चीस हज़ार रथ, जो सिर से पाँव तक सजे हुए थे। | | | | It was sent in abundance on countless oxen and palanquin bearers. Janakji also sent many beautiful beds. One lakh horses and twenty five thousand chariots, all decorated from head to toe. | |
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