| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 312.4 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 312.4  | पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई॥
सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता॥4॥ | | | | अनुवाद | | | | और उन्होंने वह (विवाह-पत्र) नारदजी के द्वारा (जनकजी के पास) भेज दिया। जनकजी के ज्योतिषियों ने भी यही गणना की थी। जब सबने यह सुना, तो कहने लगे - यहाँ के ज्योतिषी भी ब्रह्मा हैं। | | | | And he sent that (marriage chart) through Naradji (to Janakji). Janakji's astrologers had also done the same calculations. When everyone heard this, they started saying - the astrologer here is also Brahma. | |
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