श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 28a.6
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 28a.6 
रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें॥6॥
 
अनुवाद
 
 श्री राम तो केवल शुद्ध प्रेम से ही प्रसन्न होते हैं, परन्तु संसार में मुझसे अधिक मूर्ख और दुष्ट बुद्धि वाला और कौन है?
 
Shri Rama is pleased only with pure love, but who else in the world is more foolish and wicked-minded than me?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas