| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 285.1 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 285.1  | जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानू॥
जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | हे रघुकुल के कमलवन के सूर्य! हे दैत्यों के घने वन को जलाने वाले अग्नि! आपकी जय हो! हे देवताओं, ब्राह्मणों और गौओं का कल्याण करने वाले! आपकी जय हो। हे मान, मोह, क्रोध और मोह को दूर करने वाले! आपकी जय हो। | | | | O Sun of the lotus forest of Raghukul! O Agni who burns the dense forest of the demons! Victory to you! O one who does good to the Gods, Brahmins and cows! Victory to you. O one who removes pride, attachment, anger and delusion! Victory to you. | |
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