श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 235.4
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 235.4 
नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना॥
भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि॥4॥
 
अनुवाद
 
 आपका न आदि है, न मध्य और न अंत। वेद भी आपके अनंत प्रभाव को नहीं जानते। आप ही जगत के रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। आप जगत को मोहित करते हैं और स्वतन्त्र रूप से विचरण करते हैं।
 
You have no beginning, no middle and no end. Even the Vedas do not know your infinite influence. You are the creator, nurturer and destroyer of the world. You captivate the world and roam freely.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas