| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 224.2 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 224.2  | चहुँ दिसि कंचन मंच बिसाला। रचे जहाँ बैठहिं महिपाला॥
तेहि पाछें समीप चहुँ पासा। अपर मंच मंडली बिलासा॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | चारों ओर विशाल स्वर्ण मंच थे जिन पर राजा बैठते थे। उनके पीछे अन्य मंचों का एक गोलाकार घेरा सजाया गया था। | | | | All around there were huge golden platforms on which the kings would sit. Behind them, a circular enclosure of other platforms was decorated. | |
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