| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 199.5 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 199.5  | सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला॥
चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे॥5॥ | | | | अनुवाद | | | | उसके कान बहुत प्यारे हैं और गाल भी बहुत सुंदर हैं। उसकी प्यारी-प्यारी बचकानी बातें बहुत प्यारी हैं। उसके बाल जन्म से ही मुलायम और घुंघराले हैं, जिन्हें उसकी माँ ने कई तरह से संवारा है। | | | | He has lovely ears and very pretty cheeks. His sweet childish words are very cute. He has smooth and curly hair since birth, which his mother has styled in many ways. | |
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