श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 188.3
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 188.3 
गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी॥
यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा॥3॥
 
अनुवाद
 
 वे (वानर) अपनी-अपनी सुन्दर सेनाएँ बनाकर पर्वतों और वनों में सर्वत्र फैल गए। ये सब सुन्दर कथाएँ मैंने कही हैं। अब वह कथा सुनो जो मैंने बीच में छोड़ दी थी।
 
They (monkeys) formed their own beautiful armies and spread themselves everywhere in the mountains and forests. I have told all these beautiful stories. Now listen to the story which I left in the middle.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas