| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 187.1 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 187.1  | जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | हे ऋषियों, सिद्धों और देवताओं के स्वामी! तुम डरो मत। तुम्हारे लिए मैं मनुष्य रूप धारण करूँगा और उदार (पवित्र) सूर्यवंश में अंश सहित मनुष्य रूप में जन्म लूँगा। | | | | O sages, siddhas and lords of the gods! Do not be afraid. For your sake I will assume the form of a human and take birth as a human being with parts in the generous (holy) Suryavansh. | |
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