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काण्ड 1 - चौपाई 171.4  |
भानुप्रतापहि बाजि समेता। पहुँचाएसि छन माझ निकेता॥
नृपहि नारि पहिं सयन कराई। हयगृहँ बाँधेसि बाजि बनाई॥4॥ |
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| अनुवाद |
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| वह प्रताप भानु राजा को उनके घोड़े सहित कुछ ही देर में घर ले आया। उसने राजा को रानी के पास सुला दिया और घोड़े को अस्तबल में ठीक से बाँध दिया। |
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| He brought Pratap Bhanu Raja home with his horse in no time. He made the king sleep near the queen and tied the horse properly in the stable. |
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