| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 165.4 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 165.4  | हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू॥
तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्बकाल कल्याना॥4॥ | | | | अनुवाद | | | | राजा उसकी बातें सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और बोले, "हे प्रभु! अब मेरा नाश नहीं होगा। हे दयालु प्रभु! आपकी कृपा मुझ पर सदैव बनी रहेगी।" | | | | The king was very pleased to hear his words and said- O lord! I will not be destroyed now. O merciful Lord! I will always be blessed with your blessings. | |
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