| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 162.4 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 162.4  | नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोलेउ पुनि सिरु नाई॥
कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी॥4॥ | | | | अनुवाद | | | | हे भाई! मेरा नाम एकतनु है। यह सुनकर राजा ने पुनः सिर झुकाकर कहा- मुझे अपना परम भक्त समझकर, कृपया मुझे अपने नाम का अर्थ समझाइए। | | | | O brother! My name is Ektanu. Hearing this, the king again bowed his head and said- considering me your most devoted servant, please explain the meaning of your name to me. | |
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