श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 159a.4
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 159a.4 
हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा। जानत हौं कछु भल होनिहारा॥
कह मुनि तात भयउ अँधिआरा। जोजन सत्तरि नगरु तुम्हारा॥4॥
 
अनुवाद
 
 हमें आपके दर्शन दुर्लभ हो गए, लगता है कुछ अच्छा होने वाला है। ऋषि बोले- हे प्रिये! अँधेरा हो गया है। आपकी नगरी यहाँ से सत्तर योजन दूर है।
 
It was rare for us to see you, it seems that something good is going to happen. The sage said- O dear! It has become dark. Your city is seventy yojanas from here.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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