श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 159a.1
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 159a.1 
गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ॥
आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी॥1॥
 
अनुवाद
 
 सारी थकान दूर हो गई और राजा प्रसन्न हो गया। फिर तपस्वी उसे अपने आश्रम में ले गए और सूर्यास्त का समय जानकर उसे आसन दिया। फिर तपस्वी ने मधुर स्वर में कहा-
 
All the tiredness vanished and the king became happy. Then the ascetic took him to his ashram and knowing that it was sunset time, he offered him a seat. Then the ascetic spoke in a soft voice-
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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