श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  चौपाई 15.3
 
 
काण्ड 1 - चौपाई 15.3 
कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा॥
अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू॥3॥
 
अनुवाद
 
 शिव-पार्वती ने कलियुग को देखकर जगत के कल्याण के लिए शाबर मंत्रों के समूह की रचना की, मंत्रों के अक्षर बेमेल हैं, जिनका कोई उचित अर्थ नहीं है और उनका जाप नहीं किया जा सकता, फिर भी श्री शिव की शक्ति के कारण उनका प्रभाव स्पष्ट है।
 
Shiva-Parvati, after seeing the Kaliyug, for the benefit of the world, composed the group of Shabar Mantras, the letters of the mantras are mismatched, which have no proper meaning and cannot be chanted, yet their effect is evident due to the power of Shri Shiva.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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