| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 145.1 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 145.1  | बरष सहस दस त्यागेउ सोऊ। ठाढ़े रहे एक पद दोऊ ॥
बिधि हरि हर तप देखि अपारा। मनु समीप आए बहु बारा॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | दस हज़ार वर्षों तक उन्होंने वायु का सहारा भी त्याग दिया। वे दोनों एक पैर पर खड़े रहे। उनकी प्रचंड तपस्या देखकर ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी कई बार मनुजी के पास आए। | | | | For ten thousand years they even left the support of air. Both of them stood on one leg. Seeing their immense penance, Brahma, Vishnu and Shivji came to Manuji many times. | |
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