| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » चौपाई 140.2 |
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| | | | काण्ड 1 - चौपाई 140.2  | तब-तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई॥
बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | समय-समय पर ऋषियों ने परम पवित्र काव्यों की रचना की है, उनकी कथाएँ गाई हैं और नाना प्रकार की अनोखी घटनाओं का वर्णन किया है, जिन्हें सुनकर बुद्धिमान् (विवेकशील) लोग आश्चर्यचकित नहीं होते। | | | | From time to time, the sages have composed the most sacred poems, sung their stories and described various unique incidents, hearing which the wise (prudent) people are not surprised. | |
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