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काण्ड 1 - चौपाई 103.3  |
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा॥
हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ॥3॥ |
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| अनुवाद |
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| शिव-पार्वती अपने अनुयायियों के साथ कैलाश पर रहने लगे और नाना प्रकार के सुख भोगने लगे। वे प्रतिदिन नए-नए कार्य करते रहते थे। इस प्रकार बहुत समय बीत गया। |
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| Shiv-Parvati started living on Kailash with their followers, enjoying various types of pleasures. They used to do new activities every day. In this way a lot of time passed. |
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