श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक d1h-11h
 
 
श्लोक  9.8.d1h-11h 
(अद्याचार्यसुतो द्रौणिर्नैको युध्येत शत्रुभि:।)
अन्योन्यं परिरक्षद्भिर्योद्धव्यं सहितैश्च ह।
एवं ते समयं कृत्वा सर्वे तत्र महारथा:॥ १०॥
मद्रराजं पुरस्कृत्य तूर्णमभ्यद्रवन् परान्।
 
 
अनुवाद
‘आज आचार्यपुत्र अश्वत्थामा को शत्रुओं के साथ अकेले युद्ध नहीं करना चाहिए। हम सब लोग एक-दूसरे की रक्षा करते हुए एक साथ युद्ध करें।’ ऐसा नियम बनाकर सभी महारथी मद्रराज शल्य को आगे करके शत्रुओं पर तुरंत आक्रमण करने लगे॥ 10 1/2॥
 
‘Today, Acharya's son Ashwatthama should not fight alone with the enemies. We should all fight together while protecting each other. Having made such a rule, all the great warriors immediately attacked the enemies by putting Madra king Shalya in front.॥ 10 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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