श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  9.8.44-45h 
इमे ते च बलौघेन परस्परवधैषिण:॥ ४४॥
उपयाता नरव्याघ्रा: पूर्वां संध्यां प्रति प्रभो।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इस प्रकार ये और वे सिंह-योद्धा एक-दूसरे को मारने की इच्छा से प्रातःकाल एक-दूसरे के निकट आये। 44 1/2॥
 
Lord! In this way, these and those male lion warriors, desirous of killing each other, came near each other in the morning. 44 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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