श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 35-37h
 
 
श्लोक  9.8.35-37h 
धृतराष्ट्र उवाच
हते भीष्मे महेष्वासे द्रोणे कर्णे महारथे॥ ३५॥
कुरुष्वल्पावशिष्टेषु पाण्डवेषु च संयुगे।
सुसंरब्धेषु पार्थेषु पराक्रान्तेषु संजय॥ ३६॥
मामकानां परेषां च किं शिष्टमभवद् बलम्।
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! महाधनुर्धर भीष्म, द्रोण और महारथी कर्ण के मारे जाने के बाद, जब युद्धभूमि में कौरव और पाण्डव योद्धाओं में से कुछ ही शेष रह गये थे और कुन्तीपुत्र अत्यन्त क्रोधित होकर अपना पराक्रम दिखाने लगे थे, उस समय मेरी और शत्रु पक्ष की कितनी सेना शेष थी?
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! After the great archer Bhishma, Drona and the great warrior Karna were killed, when only a few Kaurava and Pandava warriors were left on the battlefield and Kunti's sons became very angry and started showing their valor, how much army was left on my and the enemy's side at that time?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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