श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  9.8.32-33h 
गौतमं भीमसेनो वै सोमकाश्च महारथा:॥ ३२॥
अभ्यद्रवन्त राजेन्द्र जिघांसन्त: परान् युधि।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! भीमसेन और महारथी सोमक ने युद्ध में शत्रुओं का संहार करने की इच्छा से कृपाचार्य पर आक्रमण किया। 32 1/2॥
 
Rajendra! Bhimsen and the great warrior Somak attacked Kripacharya with the desire to kill the enemies in the war. 32 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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