श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.8.30-31h 
ततो युधिष्ठिरो राजा स्वेनानीकेन संवृत:॥ ३०॥
शल्यमेवाभिदुद्राव जिघांसुर्भरतर्षभ:।
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने अपनी सेना के साथ घिरे हुए शल्य को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण कर दिया।
 
Bharat's best king Yudhishthira, surrounded by his army, attacked Shalya with the desire to kill him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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