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mahabharat 9.8.23-24h: हे राजन! शल्य के रथ पर बैठकर उनका सारथि उस रथ की शोभा बढ़ा रहा था। उस रथ से घिरे हुए वीर शत्रुघ्न राजा शल्य आपके पुत्रों का भय दूर करते हुए युद्ध के लिए खड़े हो गए॥ 23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  9.8.23-24h 
तस्य सूतो महाराज रथस्थोऽशोभयद् रथम्।
स तेन संवृतो वीरो रथेनामित्रकर्षण:॥ २३॥
तस्थौ शूरो महाराज पुत्राणां ते भयप्रणुत्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! शल्य के रथ पर बैठकर उनका सारथि उस रथ की शोभा बढ़ा रहा था। उस रथ से घिरे हुए वीर शत्रुघ्न राजा शल्य आपके पुत्रों का भय दूर करते हुए युद्ध के लिए खड़े हो गए॥ 23 1/2॥
 
O King of kings! Sitting on Shalya's chariot, his charioteer was enhancing the beauty of that chariot. Surrounded by that chariot, the brave Shatrughan king Shalya, dispelling the fear of your sons, stood up for the battle.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)