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mahabharat 9.8.16-17: माननीय महाराज! द्रोणाचार्य, भीष्म और सारथिपुत्र कर्ण की मृत्यु के पश्चात् आपके पुत्रों को यह प्रबल आशा थी कि शल्य युद्धभूमि में कुन्ती के समस्त पुत्रों का वध कर देंगे। ॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 9.8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.8.16-17 
आशा बलवती राजन् पुत्राणां तेऽभवत्तदा॥ १६॥
हते द्रोणे च भीष्मे च सूतपुत्रे च पातिते।
शल्य: पार्थान् रणे सर्वान् निहनिष्यति मारिष॥ १७॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! द्रोणाचार्य, भीष्म और सारथिपुत्र कर्ण की मृत्यु के पश्चात् आपके पुत्रों को यह प्रबल आशा थी कि शल्य युद्धभूमि में कुन्ती के समस्त पुत्रों का वध कर देंगे। ॥16-17॥
 
Honorable King! After the death of Dronacharya, Bhishma and charioteer's son Karna, your sons had a strong hope that Shalya would kill all the sons of Kunti on the battlefield. ॥16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)