श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  9.8.15-16h 
संजय उवाच
क्षयं मनुष्यदेहानां तथा नागाश्वसंक्षयम्॥ १५॥
शृणु राजन् स्थिरो भूत्वा संग्रामं शंसतो मम।
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, 'हे राजन! मैं उस युद्ध का वर्णन कर रहा हूँ, जिसमें हाथी, घोड़े और मनुष्यों का बहुत बड़ा संहार हुआ था; कृपया शान्त होकर सुनिए।'
 
Sanjaya said, 'O King! I am describing the battle where there was a great slaughter of elephants, horses and human beings; please listen calmly.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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