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mahabharat 9.8.12-13h: हे भरतश्रेष्ठ! वह सेना उत्पात मचाते हुए समुद्र के समान कोलाहल कर रही थी। उसके रथ और हाथी बड़े वेग से आगे बढ़ रहे थे, मानो विशाल सागर में ज्वार उमड़ रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 9.8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  9.8.12-13h 
तद् बलं भरतश्रेष्ठ क्षुब्धार्णवसमस्वनम्॥ १२॥
समुद्धूतार्णवाकारमुद्धूतरथकुञ्जरम्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वह सेना उत्पात मचाते हुए समुद्र के समान कोलाहल कर रही थी। उसके रथ और हाथी बड़े वेग से आगे बढ़ रहे थे, मानो विशाल सागर में ज्वार उमड़ रहा हो।
 
O best of the Bharatas! That army was making a noise like the turbulent ocean. Its chariots and elephants were moving forward with great speed, as if the tide was rising in a mighty ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)