श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 4-6h
 
 
श्लोक  9.7.4-6h 
विजेष्यामि रणे पार्थान् सोमकांश्च समागतान्॥ ४॥
अहं सेनाप्रणेता ते भविष्यामि न संशय:।
तं च व्यूहं विधास्यामि न तरिष्यन्ति यं परे॥ ५॥
इति सत्यं ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय:।
 
 
अनुवाद
मैं युद्धस्थल में अपने सामने आए हुए समस्त कुन्तीपुत्रों तथा सोमकों को जीत लूँगा। इसमें संशय नहीं है कि मैं तुम्हारा सेनापति बनकर ऐसी व्यूह रचना करूँगा कि शत्रु पार न कर सकेंगे। दुर्योधन! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। इसमें संशय नहीं है।॥4-5 1/2॥
 
I will conquer all the sons of Kunti and the Somakas who have come in front of me in the battlefield. There is no doubt that I will be your commander and will create such a formation that the enemies will not be able to cross. Duryodhan! I am telling you the truth. There is no doubt in this.'॥ 4-5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)