Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.7.37-38: महाराज! हे कुन्तीपुत्र! जब वे मारे जाएँ, तब तुम समझ लेना कि दुर्योधन की समस्त विशाल सेना मारी गई। इसी समय मुझसे यह सुनकर तुम महाबली मद्रराज और महाबाहो पर आक्रमण करो! जिस प्रकार इन्द्र ने नमूचिका का वध किया था, उसी प्रकार तुम भी उसका वध करो।'   |   mahabharat अध्याय 9.7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  9.7.37-38 
तस्मिन् हते हतं सर्वं धार्तराष्ट्रबलं महत्।
एतच्छ्रुत्वा महाराज वचनं मम साम्प्रतम्॥ ३७॥
प्रत्युद्याहि रणे पार्थ मद्रराजं महारथम्।
जहि चैनं महाबाहो वासवो नमुचिं यथा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हे कुन्तीपुत्र! जब वे मारे जाएँ, तब तुम समझ लेना कि दुर्योधन की समस्त विशाल सेना मारी गई। इसी समय मुझसे यह सुनकर तुम महाबली मद्रराज और महाबाहो पर आक्रमण करो! जिस प्रकार इन्द्र ने नमूचिका का वध किया था, उसी प्रकार तुम भी उसका वध करो।'
 
‘Maharaj! O son of Kunti! When they are killed, you should understand that the entire huge army of Duryodhan has been killed. At this time, on hearing this from me, attack the mighty warrior Madra king and Mahabaho! Just as Indra killed Namuchika, you should also kill him in the same manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)