श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.7.23 
प्रहर्षं प्राप्य सेना तु तावकी भरतर्षभ।
तां रात्रिमुषिता सुप्ता हर्षचित्ता च साभवत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! आपकी सेना अत्यंत प्रसन्न होकर उस रात वहीं रहकर सो गई। वह उत्साह से भरी हुई थी॥ 23॥
 
O best of the Bharatas! Your army, feeling very happy, stayed there that night and slept. It was full of enthusiasm.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)