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mahabharat 9.7.22: वे सब लोग प्रसन्न और आनन्द से भर गए और यह मानने लगे कि कुन्तीपुत्र मद्रराज शल्य के प्रभाव में आकर अवश्य ही मर जाएगा ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 9.7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  9.7.22 
हृष्टा: सुमनसश्चैव बभूवुस्तत्र सैनिका:।
मेनिरे निहतान् पार्थान् मद्रराजवशं गतान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वे सब लोग प्रसन्न और आनन्द से भर गए और यह मानने लगे कि कुन्तीपुत्र मद्रराज शल्य के प्रभाव में आकर अवश्य ही मर जाएगा ॥22॥
 
All of them became happy and filled with joy and started believing that Kunti's son Madraraj would definitely die after falling under the influence of Shalya. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)