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mahabharat 9.7.19-20: कुरुपुत्र! आज मैं पाण्डव सेनाओं को चारों दिशाओं में दौड़ा दूँगा। हे प्रभु! युद्धभूमि में आपको प्रसन्न करने के लिए आज मैं द्रोणाचार्य, भीष्म और सारथी कर्ण से भी बढ़कर पराक्रम दिखाते हुए युद्धभूमि में सर्वत्र विचरण करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 9.7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  9.7.19-20 
अद्य सैन्यानि पाण्डूनां द्रावयिष्ये समन्तत:॥ १९॥
द्रोणभीष्मावति विभो सूतपुत्रं च संयुगे।
विचरिष्ये रणे युध्यन् प्रियार्थं तव कौरव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कुरुपुत्र! आज मैं पाण्डव सेनाओं को चारों दिशाओं में दौड़ा दूँगा। हे प्रभु! युद्धभूमि में आपको प्रसन्न करने के लिए आज मैं द्रोणाचार्य, भीष्म और सारथी कर्ण से भी बढ़कर पराक्रम दिखाते हुए युद्धभूमि में सर्वत्र विचरण करूँगा।
 
Son of Kuru! Today I will make the Pandava armies run in all directions. O Lord! To please you on the battlefield, today I will roam all over the battlefield fighting and displaying valour greater than that of Dronacharya, Bhishma and charioteer Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)