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mahabharat 9.65.45: राजेन्द्र! दुर्योधन ने भी रक्त से लथपथ होकर वह रात्रि वहीं बिताई, जिससे समस्त प्राणियों के हृदय में भय व्याप्त हो गया ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.65.45 
दुर्योधनोऽपि राजेन्द्र शोणितेन परिप्लुत:।
तां निशां प्रतिपेदेऽथ सर्वभूतभयावहाम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! दुर्योधन ने भी रक्त से लथपथ होकर वह रात्रि वहीं बिताई, जिससे समस्त प्राणियों के हृदय में भय व्याप्त हो गया ॥45॥
 
Rajendra! Even Duryodhana, soaked in blood, spent that night there itself, which instilled fear in the hearts of all creatures. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)