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mahabharat 9.65.32-33h: राजा दुर्योधन को शोक से आँसू बहाते देख अश्वत्थामा प्रलयकाल की अग्नि के समान क्रोधित हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  9.65.32-33h 
तथा दृष्ट्वा तु राजानं बाष्पशोकसमन्वितम्॥ ३२॥
द्रौणि: क्रोधेन जज्वाल यथा वह्निर्जगत‍्क्षये।
 
 
अनुवाद
राजा दुर्योधन को शोक से आँसू बहाते देख अश्वत्थामा प्रलयकाल की अग्नि के समान क्रोधित हो उठा।
 
Seeing King Duryodhana shedding tears of grief, Ashvatthama became furious like the fire of doomsday. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)