Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.65.28: ‘आप सबका मुझ पर स्वाभाविक स्नेह है, इसलिए मेरी मृत्यु से जो दुःख और पीड़ा तुम्हें यहाँ हो रही है, वह न हो। यदि वेद तुम्हारे विचार से प्रामाणिक हैं, तो मैंने सनातन लोकों पर अधिकार प्राप्त कर लिया है।॥28॥ | mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा भवन्तोऽत्र तप्यन्तां सौहृदान्निधनेन मे।
यदि वेदा: प्रमाणं वो जिता लोका मयाक्षया:॥ २८॥
अनुवाद
‘आप सबका मुझ पर स्वाभाविक स्नेह है, इसलिए मेरी मृत्यु से जो दुःख और पीड़ा तुम्हें यहाँ हो रही है, वह न हो। यदि वेद तुम्हारे विचार से प्रामाणिक हैं, तो मैंने सनातन लोकों पर अधिकार प्राप्त कर लिया है।॥28॥
‘You all have natural affection for me, therefore the pain and sorrow that you are experiencing here due to my death should not happen. If the Vedas are authentic in your view, then I have gained control over the eternal worlds.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥