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mahabharat 9.65.16: ‘जिनके प्रभाव से तुम धूलि से आच्छादित हो, उन काल और लोकों की गति को जानना निःसंदेह अत्यन्त कठिन है।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  9.65.16 
दु:खं नूनं कृतान्तस्य गतिं ज्ञातुं कथंचन।
लोकानां च भवान् यत्र शेषे पांसुषु रूषित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘जिनके प्रभाव से तुम धूलि से आच्छादित हो, उन काल और लोकों की गति को जानना निःसंदेह अत्यन्त कठिन है।॥16॥
 
‘It is certainly very difficult to know the movement of time and the worlds, under whose influence you lie covered in dust.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)