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mahabharat 9.65.13: मानसिंह! इस मनुष्यलोक में निस्सन्देह कुछ भी सत्य नहीं है, सब कुछ नाशवान है, जहाँ तुम्हारे समान राजा धूलि से लिपटा हुआ लोट रहा है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.65.13 
न नूनं विद्यते सत्यं मानुषे किंचिदेव हि।
यत्र त्वं पुरुषव्याघ्र शेषे पांसुषु रूषित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मानसिंह! इस मनुष्यलोक में निस्सन्देह कुछ भी सत्य नहीं है, सब कुछ नाशवान है, जहाँ तुम्हारे समान राजा धूलि से लिपटा हुआ लोट रहा है॥13॥
 
Mansingh! Indeed, there is nothing true in this world of humans, everything is perishable, where a king like you is rolling around covered in dust.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)