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mahabharat 9.65.1-3h: संजय कहते हैं- राजन! दूतों के मुख से दुर्योधन की मृत्यु का समाचार सुनकर कौरवों के महारथी अश्वत्थामा, कृपाचार्य और सात्वतवंशी कृतवर्मा, जो मृत्यु से बच गए थे, जो स्वयं तीक्ष्ण बाणों, गदा, तोमर और शक्तियों के प्रहारों से विशेष रूप से घायल हो गए थे, वे शीघ्रगामी घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर तुरंत ही युद्धभूमि में आ गए।   |   mahabharat अध्याय 9.65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 65: दुर्योधनकी दशा देखकर अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक  »  श्लोक 1-3h
 
 
श्लोक  9.65.1-3h 
संजय उवाच
वार्तिकाणां सकाशात् तु श्रुत्वा दुर्योधनं हतम्।
हतशिष्टास्ततो राजन् कौरवाणां महारथा:॥ १॥
विनिर्भिन्ना: शितैर्बाणैर्गदातोमरशक्तिभि:।
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वत:॥ २॥
त्वरिता जवनैरश्वैरायोधनमुपागमन्।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! दूतों के मुख से दुर्योधन की मृत्यु का समाचार सुनकर कौरवों के महारथी अश्वत्थामा, कृपाचार्य और सात्वतवंशी कृतवर्मा, जो मृत्यु से बच गए थे, जो स्वयं तीक्ष्ण बाणों, गदा, तोमर और शक्तियों के प्रहारों से विशेष रूप से घायल हो गए थे, वे शीघ्रगामी घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर तुरंत ही युद्धभूमि में आ गए।
 
Sanjay says- Rajan! Hearing the news of the death of Duryodhana from the mouth of the messengers, Kaurava's great charioteer Ashvatthama, Kripacharya and Kritavarma of Satvatvanshi, who were saved from death, who themselves had been specially injured by the sharp arrows, mace, tomaar and the blows of Shaktis, immediately came to the battlefield riding on a chariot harnessed by fast moving horses. 1-2 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)