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mahabharat 9.64.7-9h: शान्तनुनंदन भीष्म, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ कर्ण, कृपाचार्य, शकुनि, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, वीर शल्य और कृतवर्मा ये सब मेरे रक्षक थे, फिर भी मैं इस अवस्था को प्राप्त हुआ हूँ। निश्चय ही, काल का उल्लंघन करना किसी के लिए भी अत्यंत कठिन है।   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 7-9h
 
 
श्लोक  9.64.7-9h 
भीष्मे शान्तनवे नाथे कर्णे शस्त्रभृतां वरे॥ ७॥
गौतमे शकुनौ चापि द्रोणे चास्त्रभृतां वरे।
अश्वत्थाम्नि तथा शल्ये शूरे च कृतवर्मणि॥ ८॥
इमामवस्थां प्राप्तोऽस्मि कालो हि दुरतिक्रम:।
 
 
अनुवाद
शान्तनुनंदन भीष्म, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ कर्ण, कृपाचार्य, शकुनि, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, वीर शल्य और कृतवर्मा ये सब मेरे रक्षक थे, फिर भी मैं इस अवस्था को प्राप्त हुआ हूँ। निश्चय ही, काल का उल्लंघन करना किसी के लिए भी अत्यंत कठिन है।
 
Shantanunandan Bhishma, Karna, the best among weapon wielders, Kripacharya, Shakuni, Dronacharya, the best among weapon wielders, Ashwatthama, brave Shalya and Kritavarma were my protectors, yet I reached this condition. Certainly, it is very difficult for anyone to violate Kaal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)