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mahabharat 9.64.40-41h: माननीय महोदय! राजा दुर्योधन का विलाप सुनकर हजारों लोगों की आँखों में आँसू भर आये और वे दसों दिशाओं में भाग गये।   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  9.64.40-41h 
ततो जनसहस्राणि बाष्पपूर्णानि मारिष॥ ४०॥
प्रलापं नृपते: श्रुत्वा व्यद्रवन्त दिशो दश।
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय! राजा दुर्योधन का विलाप सुनकर हजारों लोगों की आँखों में आँसू भर आये और वे दसों दिशाओं में भाग गये।
 
Honorable Sir! On hearing the lamentation of King Duryodhana, tears filled the eyes of thousands of people and they ran away in all ten directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)