Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.64.22-23h: मैंने अन्य राष्ट्रों पर आक्रमण किया और अनेक राजाओं की दासों की भाँति सेवा ली। मैंने सदैव अपने प्रियजनों का उपकार किया। फिर मुझसे बढ़कर और किसका अन्त हो सकता था?॥ 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  9.64.22-23h 
यातानि परराष्ट्राणि नृपा भुक्ताश्च दासवत्॥ २२॥
प्रियेभ्य: प्रकृतं साधु को नु स्वन्ततरो मया।
 
 
अनुवाद
मैंने अन्य राष्ट्रों पर आक्रमण किया और अनेक राजाओं की दासों की भाँति सेवा ली। मैंने सदैव अपने प्रियजनों का उपकार किया। फिर मुझसे बढ़कर और किसका अन्त हो सकता था?॥ 22 1/2॥
 
‘I attacked other nations and took the services of many kings like slaves. I always did good to those who were dear to me. Then who could have had a better end than me?॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)