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mahabharat 9.64.21-22h: मैंने बड़े-बड़े राजाओं को सेना में भेजा, दुर्लभ सम्मान पाया और अरबी घोड़ों पर सवार हुआ। मुझसे बढ़कर और किसका अंत हो सकता था?॥ 21/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  9.64.21-22h 
आज्ञप्तं नृपमुख्येषु मान: प्राप्त: सुदुर्लभ:॥ २१॥
आजानेयैस्तथा यातं को नु स्वन्ततरो मया।
 
 
अनुवाद
मैंने बड़े-बड़े राजाओं को सेना में भेजा, दुर्लभ सम्मान पाया और अरबी घोड़ों पर सवार हुआ। मुझसे बढ़कर और किसका अंत हो सकता था?॥ 21/2॥
 
‘I commanded great kings, received rare honours and rode on Arabian horses. Who else could have had a better end than me?॥ 21/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)