Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.64.19-20h: संजय! मैंने जीवित शत्रुओं के सिरों पर पैर रखा। मैंने यथाशक्ति धन का दान किया और अपने मित्रों से प्रेम किया। मैंने अपने सभी शत्रुओं को सदैव पीड़ा पहुँचाई। संसार में ऐसा कौन है जिसका अंत मेरे जैसा सुन्दर हुआ?॥19 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मूर्ध्नि स्थितममित्राणां जीवतामेव संजय।
दत्ता दाया यथाशक्ति मित्राणां च प्रियं कृतम्॥ १९॥
अमित्रा बाधिता: सर्वे को नु स्वन्ततरो मया।
अनुवाद
संजय! मैंने जीवित शत्रुओं के सिरों पर पैर रखा। मैंने यथाशक्ति धन का दान किया और अपने मित्रों से प्रेम किया। मैंने अपने सभी शत्रुओं को सदैव पीड़ा पहुँचाई। संसार में ऐसा कौन है जिसका अंत मेरे जैसा सुन्दर हुआ?॥19 1/2॥
‘Sanjay! I stepped on the heads of living enemies. I donated wealth as much as I could and loved my friends. I also always caused pain to all my enemies. Who is there in the world whose end was as beautiful as mine?॥19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥