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mahabharat 9.64.17-18: मेरे माता-पिता युद्ध के नियमों में पारंगत हैं। मेरी मृत्यु का समाचार सुनकर वे शोक से अभिभूत हो जाएँगे। मेरी ओर से आप उन्हें यह बताएँ कि मैंने यज्ञ किए, पालन-पोषण करने योग्य पुरुषों का पालन-पोषण किया तथा समुद्र पर्यन्त पृथ्वी पर शासन किया॥ 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  9.64.17-18 
अभिज्ञौ युद्धधर्मस्य मम माता पिता च मे॥ १७॥
तौ हि संजय दु:खार्तौ विज्ञाप्यौ वचनाद्धि मे।
इष्टं भृत्या भृता: सम्यग् भू: प्रशास्ता ससागरा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मेरे माता-पिता युद्ध के नियमों में पारंगत हैं। मेरी मृत्यु का समाचार सुनकर वे शोक से अभिभूत हो जाएँगे। मेरी ओर से आप उन्हें यह बताएँ कि मैंने यज्ञ किए, पालन-पोषण करने योग्य पुरुषों का पालन-पोषण किया तथा समुद्र पर्यन्त पृथ्वी पर शासन किया॥ 17-18॥
 
My parents are well versed in the rules of war. They will be overwhelmed with grief on hearing the news of my death. On my behalf, you should convey to them that I performed sacrifices, nurtured those who were capable of sustaining, and ruled the earth well up to the sea.॥ 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)