Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.64.16-17h: संजय! जो वीर पुरुष अपने तेज से चमकते हुए, राजसी लक्ष्मी से सेवित और अपने सहायक बन्धुओं के बीच उपस्थित शत्रु के साथ उपर्युक्त प्रकार का व्यवहार करता है, वही सम्मानित होता है (मृत व्यक्ति को मारने में क्या महिमा है)॥16 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रतपन्तं श्रिया जुष्टं वर्तमानं च बन्धुषु॥ १६॥
एवं कुर्यान्नरो यो हि स वै संजय पूजित:।
अनुवाद
संजय! जो वीर पुरुष अपने तेज से चमकते हुए, राजसी लक्ष्मी से सेवित और अपने सहायक बन्धुओं के बीच उपस्थित शत्रु के साथ उपर्युक्त प्रकार का व्यवहार करता है, वही सम्मानित होता है (मृत व्यक्ति को मारने में क्या महिमा है)॥16 1/2॥
Sanjay! The brave man who behaves in the above manner with an enemy who is shining with his own brilliance, is served by the royal goddess Lakshmi and is present among his helpful relatives, is the one who is honored (what is the glory in killing a dead person)॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥