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mahabharat 9.64.15-16h: आज जब मेरी जाँघें टूट गई हैं, ऐसी अवस्था में कुपित भीमसेन ने मेरे सिर पर लात मारी है। इससे बढ़कर आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है?॥ 15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  9.64.15-16h 
किन्नु चित्रमितस्त्वद्य भग्नसक्थस्य यन्मम॥ १५॥
क्रुद्धेन भीमसेनेन पादेन मृदितं शिर:।
 
 
अनुवाद
आज जब मेरी जाँघें टूट गई हैं, ऐसी अवस्था में कुपित भीमसेन ने मेरे सिर पर लात मारी है। इससे बढ़कर आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है?॥ 15 1/2॥
 
Today when my thighs are broken, in such a condition the enraged Bhimasena has kicked my head. What can be more astonishing than this?॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)